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Internet ( इंटरनेट : सामान्य परिचय)

 इंटरनेट : सामान्य परिचय 

 ( इंटरनेट : सामान्य परिचय)
 ( इंटरनेट : सामान्य परिचय)

 Internet in India : भारत में इंटरनेट

भारत में इंटरनेट का आरम्भ आठवें दशक के अंतिम वर्षों में शिक्षा और अनुसन्धान नेटवर्क के रूप में हुआ  था  | इसके लिए भारत सरकार के इलैक्ट्रोनिक  विभाग और संयुक्त राष्ट्र विकासकारी क्रम में आर्थिक सहायता उपलबध करवाई गई थी | इस परियोजना में पांच प्रमुख संसथान जैसे राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर टैक्नोलॉजी केंद्र मुंबई ,भारतीय विज्ञानं संस्थान  बंगलौर ,भारतीय  प्रौद्योगिकी   संस्थान  और इलैक्ट्रॉनिक  निर्देशालय शामिल थे | एक अन्य प्रमुख नेटवर्क नेशनल इन्फोर्मेटिक सेन्टर (एन आई सी ) के रूप में सामने आया ,जिसने प्रायः सभी मुख्यालय को राष्ट्रीय नेटवर्क के साथ जोड़ दिया | आम आदमी के लिए भारत में इंटरनेट का आगमन 15 अगस्त 1998 को आरम्भ हो गया था | शुरू के कुछ वर्षों तक इंटरनेट की पहुँच काफी धीमी रही , लेकिन हाल के कुछ वर्षों में बी. एस. एन.एल. के उपभोगताओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई | | भारत में इंटरनेट के  उपभोगताओं की संख्या करोड़ के आंकड़े  को पार कर चुकी है | अनेक राज्य सरकारों ने सूचना प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां अपनाई हैं और उन्होंने इंटरनेट की सुविधा को हर ग्राम में पहुँचाने का सफल प्रयास किया है | आज इंटरनेट की सुविधा  घर - घर पहुँच चुकी है |

  आधुनिकता के दौर  में इंटरनेट ने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर लिया है बात चाहे  सैनिक सेवाओं की  हो चाहे  स्कूल , हस्पताल , बैंक ,रेलवे ,हवाई अड्डे ,बिजली बोर्ड के दफ्तर ,मुन्सिपलिटी के कार्यालय आदि  की सारे  इंटरनेट से जुड़ चुके हैं  | व्यक्ति को अपना लैपटॉप भी रखने की जरूरत नहीं रही  बल्कि वह सारा काम मोबाइल के माधयम से ही करने लगा है  , यहाँ तक कि  घर के कामकाज में भी इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सफल सिद्ध हुआ है  | कोई खाना बनाने की विधि हो या फिर स्वेटर बुनना ,सिलाई ,कढ़ाई , यहाँ तक कि किसी भी प्रकार की  वास्तु की खरीदारी करने  आदि की जानकारी भी आसानी से प्राप्त हो रही है | इन सबके चलते मनुष्य की दिनचर्या में बहुत अंतर आ चुका है ,  उसे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए समय व्यर्थ नहीं करना पड़ता ,घंटों तक कतारों में नहीं लगना  पड़ता ,सब कुछ ऑन - लाइन और सस्ता मिल रहा है|  बाज़ार तक जाने  के झंझट नहीं रहे यहाँ तक कि खाना भी घर बैठे -  बैठे ही मंगवाया जा सकता है | इसप्रकार मानव की जीवन शैली  पूरी तरह से  बदल चुकी है |

नकारात्मक पहलू :Negative aspects

 प्रत्येक चीज अपने अंदर गुण और दोष समाहित करके चलती है ,  इंटरनेट भी  दोषों से मुक्त  नहीं है | इस टेक्नोलॉजी के द्वारा जहाँ भिन्न -भिन्न जानकारियां हासिल होती है ,वहीं बच्चों  को यह उम्र से पहले ही प्रौढ़ बना रही है ,जो कि उनके मानसिक व् बौद्धिक विकास के लिए  हानिकारक है | बच्चों में पढ़ ने की प्रवृति लगभग ख़त्म हो चुकी है | पुस्तकालय का प्रयोग तो आज बच्चे , युवा और बुड्ढे सब भूल गए हैं   |  मनुष्य  के पास अपने दोस्तों के पास बैठने  तक का समय नहीं रहा , दोस्त तो क्या घर के सदस्यों के साथ भी बातचीत लगभग समाप्त हो रही है , सब कुछ मैसेज  के ज़रिये आदान - प्रदान हो रहा है | बच्चे  तो खेल कूद से बिलकुल टूट चुके हैं ,तरह तरह की बिमारियों से ग्रस्त हो रहें हैं | यह आने वाले समय के लिए एक भयंकर चेतावनी है यदि समय रहते ही इसके ऊपर निषेद्ध न लगाया गया तो सिवाय बीमार मानसिकता के कुछ भी हाथ नहीं आएगा और देश फिर से गुलामी जंजीरों में जकड़  कर रह जायेगा | ज़रूरत है युवाओं और बच्चों को नैतिक मूल्यों से जोड़ने की किन्तु उसके लिए भी पहले हमें खुद अपनी सीमाएं बनानी पड़ेंगी ,  तभी जा कर कहीं इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है |     

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