Offer

Ritikaal -(online) रीतिकाल की जानकारी

रीतिकाल सम्बन्धी जानकारी : 

हिंदी साहित्य के इतिहास को चार भागों में विभाजित किया गया है : आदिकाल ,भक्तिकाल ,रीतिकाल ,आधुनिक काल | 
रीतिकाल का समय : 1700 से 1900 तक  | 
रीति शब्द का अर्थ : काव्यांग निरूपण | "विशिष्ट पद रचना रीति " | 

विभिन्न विद्वानों द्वारा दिए गए नाम : 

रीतिकाल सम्बन्धी जानकारी
रीतिकाल 
1 . मिश्रबन्धु : अलंकृत काल | 
2 . पं. विशवनाथ प्रसाद मिश्र : श्रृंगार  काल | 
3 . डॉ. रामशंकर रसाल : कलाकाल | 
4 . आचार्य रामचन्द्र  शुक्ल : रीतिकाल | 

रीतिकाल का प्रवर्तक : केशव 

केशव की प्रमुख  रचनाएँ : कविप्रिया ,रसिक प्रिया | 

 रीतिकाव्य की प्रमुख धाराएं : 

 1 . रीतिबद्ध : इन्होंने शस्टरज्ञान का प्रतिपादन किया या यह कहा जाये कि इन कवियों  ने काव्य के विभिन्न अंगों यथा -काव्य लक्षण ,काव्य हेतु ,प्रयोजन ,काव्य भेद ,काव्य आत्मा ,शब्द शक्ति ,गुण  दोष ,रीति अलंकार ,छंद आदि का विवेचन प्रस्तुत कर काव्य रचना की | 
2 . रीतिसिद्ध : इन्होंने कोई लक्षण ग्रन्थ नहीं लिखा बल्कि इनका धयान केवल अलंकार, रस ,ध्वनि ,नायिका भेद आदि तक ही सीमित था | 
3 . रीतिमुक्त : इन कवियों ने न तो लक्षण ग्रन्थ लिखा और न ही अलंकारों व् शैली से बोझिल काव्य रचा इनके काव्य में भाव पक्ष को प्रधानता प्राप्त है | 

रीतिकालीन कवि : केशव ,  देव,  भूषण, घनानंद , बिहारी लाल |  

रीतिकालीन कवियों  की रचनाएँ : 
देव :  भाव विलास ,सुजान  विनोद , राग रत्नाकर ,प्रेमचन्द्रिका ,अष्टयाम , सुख सागर इत्यादि | 
भूषण : शिव राज भूषण ,शिवा बावनी , छतरसाल दशक | 
घनानंद : सुजान सागर , विरह लीला ,इश्क लता ,सूजन राग माला , प्रीति पवास ,वियोग बेलि ,नेह सागर ,प्रेम पत्रिका | 
बिहारी लाल : इनकी एकमात्र रचना "बिहारी सतसई" है , जिसमें लगभग 719 दोहे संकलित हैं  |  



Important links:


Ritikaal -(online) रीतिकाल की जानकारी 







Previous
Next Post »

Thanks for your comment. ConversionConversion EmoticonEmoticon