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Hindi language & Grammer ( भाषा &व्याकरण)



भाषा और व्याकरण (Hindi)
हिंदी व्याकरण

 भाषा और व्याकरण की असमानताएं  

जैसा कि भाषा और व्याकरण की चर्चा पहले कर चुके हैं, उससे इन दोनों की समानता से इस बात की पुष्टि भी हो  है अतैव  आरम्भ में जब व्याकरणों की रचना हुई तो ’पाणिनि’ व पतंजलि ने भी अपने व्याकरणिक  ग्रन्थों ’अष्टाध्यायी’ तथा ’महाभाष्य’ में भाषा को व्याकरणिक व भाषा वैज्ञानिक पद्धति से ही विश्लेषण किया था । दोनों का सम्बन्ध भाषा के अध्ययन से है । कुछ विद्वानों ने व्याकरण और भाषाविज्ञान में परस्पर सम्बन्ध को स्वीकार तो किया है किन्तु साथ ही कुछ असमानताएं भी निर्धारित की हैं जिनमें से कुछ का उल्लेख  निम्न अनुसार है -

(1) व्याकरण का सम्बन्ध कला से अधिक है जबकि भाषा विज्ञान पूर्ण रूप में विज्ञान की ओर उन्मुख है।
भाषा और व्याकरण
भाषा विज्ञान
(2) व्याकरण का प्रमुख कार्य भाषा की शुद्धि व अशुद्धता पर ध्यान केन्द्रित करना है किन्तु भाषा विज्ञान का कार्य भाषा के बदलते हुए रूपों के पीछे रहने वाले कारणों  को ढूंढना है ।
(3) व्याकरण किसी एक भाषा का एक कालिक अध्ययन प्रस्तुत करता है जबकि भाषा विज्ञान एक से अधिक भाषाओं का विभिन्न कालों के अन्तर्गत अध्ययन प्रस्तुत कर पाने में समर्थ होता है ।
(4) व्याकरण की दृष्टि में जो अशुद्ध है, उसी त्रुटि को खोजना भाषा विज्ञान के विकास में सहायक सिद्ध होता है ।
(5) व्याकरण किसी मानक भाषा का ही अध्ययन करता है जबकि भाषा विज्ञान में व्यक्ति बोली,आदिम बोलियां,जिनका कोई मानक रूप है ही नहीं,सभी का अध्ययन करता है अर्थात् विज्ञान अप्रचलित बोलियों का अध्ययन करने में सक्षम है ।
(6) भाषा विज्ञान के अन्तर्गत जो रूप वर्तमान में परिवर्तित होते हैं, वे ही बाद में व्याकरण द्वारा शुद्ध रूप में अपनाए जाते हैं इसलिए व्याकरण भाषा विज्ञान           का अनुगामी है ।
(7) व्याकरण में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया-विशेषण, योजक आदि            आठ प्रकार के नियमों का अध्ययन किया जाता है जबकि भाषा विज्ञान में             इनके साथ-साथ स्वनिम, उपरूपिम, रूपिम, अर्थ, अर्थ-परिवर्तन आदि सभी का अध्ययन दृष्टिगोचर होता है ।
(8) व्याकरण किसी एक भाषा तक ही सीमित है, किन्तु भाषा विज्ञान एक साथ             विश्व स्तर पर बोली व पाई जाने वाली भाषाओं का आकृतिमूलक व पारिवारिक       आधार पर वर्गीकरण भी करता है ।
(9) व्याकरण विवरणात्मक या वर्णनात्मक होता है, किन्तु भाषा विज्ञान                    व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक रूप प्रस्तुत करता है जैेसे - ’’हिन्दी व्याकरण    ’पुस्तक’ शब्द को स्त्रीलिंग कह देता है, पर उसका कारण नहीं बताता ।                   संस्कृत के नपुंसक लिंग ’पुस्तक’ शब्द का हिन्दी में सामान्यतः पुल्लिंग में          प्रयोग होना चाहिए किन्तु ’अरबी भाषा की ’किताब’ शब्द के प्रभावस्वरूप             ’पुस्तक’ शब्द का स्त्रीलिंग में व्यवहार होने लगा । यही कारण है कि भाषा-विज्ञान     को व्याकरण का व्याकरण कहते हैं ।’’ 
(10) आधुनिक मतानुसार व्याकरण की विवेचना प्रस्तुत करने वाले घटक हैं - भाषा की रूप-रचना और वाक्य-गठन, किन्तु भाषा विज्ञान ध्वनि, अर्थ, शब्द-समूह, लिपि आदि का भी पूर्ण विवेचन प्रस्तुत करता है । 

अतःकहा जा सकता है कि व्याकरण का उद्देश्य किसी भाषा के प्रचलित रूप का सम्यक् ज्ञान प्रदान करना है।भाषा चाहे अभिव्यक्ति का एक माध्यम है किन्तु नियमबद्धता हो जाने के कारण वही भाषा साकारात्मक रूप में परिवर्तित हो जाती है । 

 महत्वपूर्ण तथ्यों से जुड़ने के लिए कृपया लिंक करें | 



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