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Language & Grammer (HINDI)


भाषा और व्याकरण


मानव मुख से निकली सार्थक ध्वनि समूह भाषा कहलाती है ।चूँकि भाषा नित्य परिवर्तनशील वस्तु है और इसे व्यवस्थित  करने के लिए स्थायित्व की  आवश्यकता होती है और परिवर्तन की गति को नियंत्रित करके ही भाषा  के स्वरूप को यथासंभव स्थिर रखने का प्रयास निरन्तर होता आया है, व्याकरण इसी का प्रतिरूप है । यदि भाषा पर व्याकरणिक नियंत्रण न हो तो एक पीढ़ी की भाषा दूसरी पीढ़ी के लिए कुछ सीमा तक दुर्बोध हो जाती है और इसका स्वरूप समझने में भी असमर्थता आ जाती है । भाषा और व्याकरण दोनों एक दूसरे के  पूरक हैं। व्याकरण वस्तुतःकिसी भाषा की ध्वनियों ,शब्दों ,रूपों और वाक्यों के स्वरूप एवं प्रयोग का विश्लेषण करता है । वैज्ञानिक दृष्टि से अनेक शास्त्रों का आपस में गहरा सम्बन्ध देखा जा सकता है जिसमें से एक है ,भाषा विज्ञान । इसके द्वारा एक तो भाषायी तत्वों की शुद्धता,अशुद्धता की और ध्यान दिलाया जाता है तो दूसरा उन्ही तत्वों के ऐतिहासिक विकास पर दृष्टिपात किया जाता है।
भाषा और व्याकरण
भाषा विज्ञान
                                            भाषा की नियमबद्धता हो जाने के कारण भाषा सकारात्मक रूप में परिवर्तित हो जाती है। नियमों के अभाव से अर्थ का अनर्थ हो जाता है।  व्याकरण भाषा के नियमों का निर्देश कर इसके पूर्ण आंकलन शुद्ध उच्चारण और निर्दोष लेखन का मार्ग प्रशस्त करता है, अतःव्याकरण की उपयोगिता सर्वथा असंदिग्ध है , इसी प्रकार भाषा विज्ञान व्याकरण का व्याकरण है, व्याकरण द्वारा निर्दिष्ट नियमों की व्याख्या एवं अध्ययन प्रस्तुत करना भाषा विज्ञान का कार्य है । अतः शुद्ध भाषा की जानकारी के लिए जितना व्याकरण आवश्यक है ,उतना ही व्याकरणिक नियमों की व्याख्या और उसके अध्ययन के लिए विज्ञान का महत्वपूर्ण स्थान है । व्याकरण को नवीन रूप देकर गौरवान्वित करने का कार्य केवल भाषा विज्ञान का ही है । भाषा सम्बन्धी अनेकानेक जिज्ञासाओं के समाधान के लिए व्याकरण और भाषा विज्ञान दोनों का अपना _अपना महत्त्व है। इनके अभाव में हिंदी भाषा को जान पाना मुश्किल ही नहीं असंभव भी है । 

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