Offer

Intro... of Sikh


सिक्ख की परिभाषा 

सिक्ख धर्म ,एक ऐसा धर्म जो समूची मानव जाति को एक धागे में  पिरो कर एक अकाल पुरख प्रभु के चरणों के साथ जुड़ने की प्रेरणा देता है |  जब तक हम निरंकार ज्योत स्वरूप प्रभु के साथ जुड़े रहेंगे, तब तक हमारा अस्तित्व भी जीवित रह सकेगा | अगर हम अपने  केंद्र अर्थात प्रभु शक्ति से दूर हो जायेंगे तो हमारा विनाश संभव है | इस प्रकार धर्म हमें उस शक्ति से जुड़ने के लिए सदैव प्रेरित करता है | सिक्ख धर्म जिसने चार वर्णो को एक डोर मैं बाँध कर रखा हुआ है | कोई भी जाति कोई भी नसल ,किसी भी रंग रूप का व्यक्ति क्यूँ न हो सिक्ख धर्म ने सबको अपनाया है | इसकी इन्हीं प्रवृतियों के कारण  ही यह अपनी अलग पहचान कायम किये हुए है | सिक्ख कौन  है ? सर्वप्रथम यह जानना अनिवार्य है |
सिक्ख ,जो अपने जीवन को उच्च बनाने के लिए हर वक्त  सीखता है, वह अपने गुरु द्वारा दर्शाये हुए मार्ग पर चल कर उन उपदेशों को जीवन में  धारण करने का संकल्प लेता है | गुरबाणी का भी यह ही फ़रमान है कि

                       
                      "ਸੋ ਸਿਖੁ  ਸਖਾ ਬੰਧਪ ਹੈ ਭਾਈ ,ਜਿ ਗੁਰ ਕੇ ਭਾਣੇ ਵਿਚ  ਆਵੈ || 
                                 ਆਪਣੇ ਭਾਣੇ ਜੋ ਚਲੈ ਭਾਈ ,ਵਿਛੁੜਿ ਚੋਟਾ ਖਾਵੈ ||"

                                                                                                          (ਰਾਗ ਸੋਰਠਿ ਮ :3 ,ਅੰਗ 601)   
सिक्ख की परिभाषा
 ਪੰਜ ਪਿਆਰੇ 
    सिक्ख रहित  मर्यादा में सिक्ख की तारीफ की परिभाषा कुछ इस प्रकार है "जो स्त्री या पुरुष एक अकाल पुरुख ,दस गुरु साहिबान (श्री गुरु नानक देव जी से लेकर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी तक)श्री गुरु ग्रन्थ साहिब और दस गुरु साहिबान की बाणी और दशमेश पिता  जी के अमृत के ऊपर पूर्ण निश्चय रखता है और किसी दूसरे  धर्म को नहीं मानता ,वह सिक्ख है | "अतः कहा जा सकता है कि जो गुरु के शब्द को हृदय में धारण कर , उसी के अनुरूप अपना जीवन व्यतीत करे ,जिसमे सच्च ,संतोष  , दया, धर्म आदि गुण मौजूद हों और वह काम ,क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार से सदैव दूर रहे ,वही सच्चा सिक्ख कहलाने का हक़दार है | सदा प्रभु के गुणों का गुणगान करना उसके जीवन का महत्वपूर्ण कार्य होता है | 
Previous
Next Post »

Thanks for your comment. ConversionConversion EmoticonEmoticon